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बुद्धिमान मेहरारू आपन घर बनावत ह; मुला मूरख मेहरारू आपन ही हाथन स आपन घर उजाड़ देत ह।
उ लोग जउन सच्ची राह पइ चलत ह आदर क संग उ यहोवा स डेरात ह। मुला ओकर जेका राह टेढ़ी अहइ उ यहोवा स घिना करत ह।
मूरख क बातन ओकरे बरे मुसीबत लावत ह। किंतु बुद्धिमानन क वाणी ओकर रच्छा करत ह।
जहाँ बर्धा नाहीं होतेन, खरिहान खाली रहत हीं, बर्धा क बल पइ ही भरपूर फसल होत ह।
एक सच्चा साच्छी कबहुँ नाहीं छलत ह मुला झूठा गवाह, झूठ उगलत रहत ह।
एक अनुसासनहीन मनइ बुद्धि तलास करत ह किन्तु एका नाहीं पावत ह। मुला जउन सिखइ क इच्छा करत ह आसानी स गियान पावत ह।
मूरख क संगत स दूरी बनाए राखा, काहेकि ओकरी वाणी मँ तू गियान नाहीं पउब्या।
गियानी जनन क गियान इहइ मँ अहइ कि उ पचे आपन राहन क चिंतन करइँ। किन्तु मूरखन आपन मूरखता स धोका खात ह।
एक मूरख आपन कीन्ह भवा बुरा करम क दण्ड पइ जेका ओका देइ होइ हसँत ह। किन्तु एक बुद्धि मान मनइ छमा पावइ क जतन करत ह।
हर मन आपन निजी पीड़ा क जानत ह, अउर ओकर दुःख कउनो नाहीं बाँटि पावत ह।
दुट्ठ क इमारत क ढहाइ दीन्ह जाइ, मुला सज्जन क डेरा फूली फली।
अइसी ही राह होत ह जउन मनई क उचित जान पड़त ह; मुला परिणाम मँ उ मउत क लइ जात ह।
हँसत भए भी हिरदय रोवत रहि सकत ह, अउर आनन्द दुःखे मँ बदल सकत ह।
बिस्सासहीन क, आपन वुमार्गन क फल भोगइ क पड़ी; अउर सज्जन सुमार्गन क प्रतिफल पाइ।
एक नादान सब कछू क बिस्सास कइ लेत ह। मुला विवेकी जन सोच-समुझिके गोड़ धरत ह।
बुद्धिमान मनई सचेत रहत ह अउर आपन क पापे स दूर रखत ह। मुला मूरख मनई लापरवाह होत ह अउर अतिबिस्सास रखत ह।
अइसा मनई जेका हाली किरोध आवत ह, उ मूरखता स भरा काम कइ जात ह अउर उ मनई छल-छंदी होत ह उ तउ सब ही क पावत ह
एक नादान जन क बस मूरखता मिल पावत ह मुला एक बुद्धिमान मनइ क सिरे पइ गियान क मवुट होत ह।
दुर्जन नीक लोगन क समन्वा सिर निहुरइहीं, अउर दुट्ठ मनइ इमानदार लोगन क जरिए हराइ जाइ।
गरीब क ओकर पड़ोसी भी दूर राखत हीं; मुला धनी जन क मीत बहोत होत हीं।
जउन आपन पड़ोसी क तुच्छ मानत ह उ पाप करत ह मुला जउन गरीबन पइ दाया करत ह उ जन धन्न अहइ।
अइसे मनइयन जउन सडयंत्र रचत हीं का गलती नाही करत हीं? मुला जउन भली जोजना रचत हीं, उ तउ पिरेम अउर बिस्सास पावत हीं।
मेहनत क प्रतिफल मिलत हीं; मुला कोरा बकवास बस दीनता लावत ह।
विवेकी क प्रतिफले मँ धन मिलत ह; पर मूरखन क प्रतिफले मँ सिरिफ मूरखता मिलत ह।
एक सच्चा गवाह अनेक जिन्नगी बचावत ह। पर झूठा गवाह, तबाही लावत ह।
अइसा मनई जउन परमेस्सर स डेरात ह, उ परमेस्सर म सुरच्छित जगह पावत ह। अउर हुवँइ ओनके गदेलन क भी सरण मिलत ह।
यहोवा क भय जिन्नगी क सोता होत ह, उ मनई क मउत क फंदे स बचावत ह।
विस्तृत बिसाल परजा राजा क महिमा अहइ, मुला परजा बिना राजा नस्ट होइ जात ह।
धीरज स पूर मनई बहोतइ समुझ-बूझ राखत ह। मुला अइसा मनई जेका हालीं स किरोध आवइ उ तउ आपन ही बेववूफी देखावत ह।
सान्त मन तने क जिन्नगी देत ह मुला जलन हाड़न तलक नास कइ देत ह।
जउन गरीब क सतावत ह, उ तउ सबक सिरजनहार क अपमान करत ह। मुला उ तउ कउनो गरीब पइ दयालु रहत ह, उ परमेस्सर क आदर करत ह।
जब विनास आवत ह तउ दुट्ठ मनइ तबाह होइ जाइ; मुला धमीर् जन तउ मउत मँ भी सुरच्छित स्थान पइ रहत ह।
बुद्धिमान क हिरदय मँ बुद्धि क निवास होत ह, अउर मूरखन क बीच भी उ आपन क जनावत ह।
नेकी स रास्ट्र क उत्थान होत ह; मुला पाप हर जाति क कलंक होत ह।
विवेकी सेवक, राजा क खुसी अहइ, मुला उ सेवक जउन मूरख होत ह उ ओकर किरोध जगावत ह।